गुरुवार, 5 सितंबर 2013

~~~ संघर्ष ~~~

                              ~~~  संघर्ष ~~~
ऊँच- नीच  के भेद  भुलाकर  ,  हिंसा  की  अग्नि  को मिटा  कर ।
राजनीति  के  चक्रव्यूह  से  , कूटते  भारतवर्ष  को  ,
निकालना  है सहर्ष  हमें  ,
करना है संघर्ष  हमें  , करना  है  संघर्ष ।।
बन के  आज  का  अभिमन्यु , मात  नहीं  है  खानी हमें
आतंकवाद  और  भ्रष्ट।च।रियो  को ,  सबक  खूब  सिखानी  हमें ।
सोने की चिरीयाँ को  वापस  , सोने  का  बनाना  है
एकता  और  अखंडता की  शक्ति  का   , एह्शाश  फिर से  दिलाना  है.।
भ्रस्टाचार  की ये  खुली  चुनौती  , स्वीकार  है सहर्ष  हमें
करना है संघर्ष  हमें  , करना  है  संघर्ष ।।
वेद  और  उपनिषदों  के , ज्ञान  को  फैलाना है ,
गीता  , गुरुग्रंथ  , बाइबिल  और  कुरान  की  , महत्ता  को  बताना  है ।
शुभ  ज्योति  के  पूंज  को  , अनादी  अनुपम  बनाना  है
मातृभूमि  के  मस्तक  को  , ऊँचा  सदा  उठाना  है ।
रास्ट्र  सेवा  में  हर  जोखीम  , स्वीकार  है  सहर्ष  हमें
करना है संघर्ष  हमें  , करना  है  संघर्ष ।।
रक्त्चरित्र  की  आग  को  , सत्याग्रह  से  बुझाना  है
सरफ़रोश  की  पुकार  को  , स्वदेश  में  फैलाना  है ।
बुलंद  भारत  की  आवाज़  को  , और  बुलंद  बनाना  है
हर  भारतीयों  के मुख  से  बस , चक  दे  इंडिया  सुनाना  है.।
राष्ट्र हित  के लिये  बॉर्डर  पे , जाना  है  सहर्ष  हमें
करना है संघर्ष  हमें  , करना  है  संघर्ष ।।
लक्ष्य  शाश्वत  है  हमारा  , अचूक  हमारा  निशाना  है
कलाम  साहब से  प्रेरित  हर बच्चे  को , मिसाइल  मैन  बनाना  है ।
शिक्षा की  ज्योति  का  प्रकाश  , पुरे भारत  में  फैलाना  है
अपना एक ही  सपना बस  , इस विकाशशील  भारत को
विकशित  राष्ट्र  बनाना  है  … ………. …… । ।
हिन्द देश  की  सेवा  में  बस  जीना  , और  मरना  है  सहर्ष  हमें
करना है संघर्ष  हमें  , करना  है  संघर्ष ।।
                                  ………… विपुल  शरण  श्रीवास्तव  (~ विप्स ~ )