~~~ संघर्ष ~~~
ऊँच- नीच के भेद भुलाकर , हिंसा की अग्नि को मिटा कर ।
राजनीति के चक्रव्यूह से , कूटते भारतवर्ष को ,
निकालना है सहर्ष हमें ,
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
बन के आज का अभिमन्यु , मात नहीं है खानी हमें
आतंकवाद और भ्रष्ट।च।रियो को , सबक खूब सिखानी हमें ।
सोने की चिरीयाँ को वापस , सोने का बनाना है
एकता और अखंडता की शक्ति का , एह्शाश फिर से दिलाना है.।
भ्रस्टाचार की ये खुली चुनौती , स्वीकार है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
वेद और उपनिषदों के , ज्ञान को फैलाना है ,
गीता , गुरुग्रंथ , बाइबिल और कुरान की , महत्ता को बताना है ।
शुभ ज्योति के पूंज को , अनादी अनुपम बनाना है
मातृभूमि के मस्तक को , ऊँचा सदा उठाना है ।
रास्ट्र सेवा में हर जोखीम , स्वीकार है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
रक्त्चरित्र की आग को , सत्याग्रह से बुझाना है
सरफ़रोश की पुकार को , स्वदेश में फैलाना है ।
बुलंद भारत की आवाज़ को , और बुलंद बनाना है
हर भारतीयों के मुख से बस , चक दे इंडिया सुनाना है.।
राष्ट्र हित के लिये बॉर्डर पे , जाना है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
लक्ष्य शाश्वत है हमारा , अचूक हमारा निशाना है
कलाम साहब से प्रेरित हर बच्चे को , मिसाइल मैन बनाना है ।
शिक्षा की ज्योति का प्रकाश , पुरे भारत में फैलाना है
अपना एक ही सपना बस , इस विकाशशील भारत को
विकशित राष्ट्र बनाना है … ………. …… । ।
हिन्द देश की सेवा में बस जीना , और मरना है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
………… विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
ऊँच- नीच के भेद भुलाकर , हिंसा की अग्नि को मिटा कर ।
राजनीति के चक्रव्यूह से , कूटते भारतवर्ष को ,
निकालना है सहर्ष हमें ,
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
बन के आज का अभिमन्यु , मात नहीं है खानी हमें
आतंकवाद और भ्रष्ट।च।रियो को , सबक खूब सिखानी हमें ।
सोने की चिरीयाँ को वापस , सोने का बनाना है
एकता और अखंडता की शक्ति का , एह्शाश फिर से दिलाना है.।
भ्रस्टाचार की ये खुली चुनौती , स्वीकार है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
वेद और उपनिषदों के , ज्ञान को फैलाना है ,
गीता , गुरुग्रंथ , बाइबिल और कुरान की , महत्ता को बताना है ।
शुभ ज्योति के पूंज को , अनादी अनुपम बनाना है
मातृभूमि के मस्तक को , ऊँचा सदा उठाना है ।
रास्ट्र सेवा में हर जोखीम , स्वीकार है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
रक्त्चरित्र की आग को , सत्याग्रह से बुझाना है
सरफ़रोश की पुकार को , स्वदेश में फैलाना है ।
बुलंद भारत की आवाज़ को , और बुलंद बनाना है
हर भारतीयों के मुख से बस , चक दे इंडिया सुनाना है.।
राष्ट्र हित के लिये बॉर्डर पे , जाना है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
लक्ष्य शाश्वत है हमारा , अचूक हमारा निशाना है
कलाम साहब से प्रेरित हर बच्चे को , मिसाइल मैन बनाना है ।
शिक्षा की ज्योति का प्रकाश , पुरे भारत में फैलाना है
अपना एक ही सपना बस , इस विकाशशील भारत को
विकशित राष्ट्र बनाना है … ………. …… । ।
हिन्द देश की सेवा में बस जीना , और मरना है सहर्ष हमें
करना है संघर्ष हमें , करना है संघर्ष ।।
………… विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
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