~~~~~~~~~~~~~ इम्तिहान ~~~~~~~~~~~~~
हे प्रभु इस दास की ,इतनी विनय सुन लीजिये ,
मार ठोकर पार बस नाव मेरी कीजिये ........|
मैं नहीं डरता , प्रलय और तुफानो से ,
कांपती है रूह मेरी , सदा इम्तिहानों से ....||
पाठ पढ़ कर याद करना , याद कर के सोंचना ..,
सोंच कर के लिखना , लिख कर फिर पूछना ..|
भाग्य में न जाने , कौन सा अभिशाप है .........,
रात में हु खूब पढता , सुबह मैदान मिलता साफ़ है ...||
नाश हो इतिहाश का , सपने समुद्र बह गए .....,
मरने के लिए वो मर गए , रोने के लिए हम रह गए ...|
गणित के अलावा मुझे कुछ आता नहीं ,लेकिन क्या करूँ..?
अलजेब्रा का माइनस प्लस , समझ में आता नहीं ....||
क्या कहु जीव-विज्ञान की कहानी ,
नर-कंकाल देखते ही याद आती है नानी ...|
ये प्रश्न भूगोल का है , गोल कैसे ये धरा ...?
मैंने लिख दिया चाट उत्तर खरा , गोल है पूरी -कचौरी ...
रशगुल्ला भी गोल है ,अतः शिक्षक महोदय
ये धरा भी गोल है ...||
शिक्षक ने कहा ... , ठीक है बेटा ,
तेरी लेखनी भी गोल है .........|
गोल है ये कलम दावात ,
ले तेरा नम्बर भी गोल है .....||
रोज मच्छर रात में , कहता यही कान में ...
होश कर के बैठना , इस बार इम्तिहान में .... |
आ गया तेरी शरण में , ज़िन्दगी से हार कर .....
मार थप्पड़ लात घूंसा , मेरा बेरा पार कर ....||
जिसने लिखी ये कविता , विपुल उसका नाम है ..|
स्टूडेंट है बी.आई.टी.एम. का , घर मेकर ग्राम है ....||
....... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~)
हे प्रभु इस दास की ,इतनी विनय सुन लीजिये ,
मार ठोकर पार बस नाव मेरी कीजिये ........|
मैं नहीं डरता , प्रलय और तुफानो से ,
कांपती है रूह मेरी , सदा इम्तिहानों से ....||
पाठ पढ़ कर याद करना , याद कर के सोंचना ..,
सोंच कर के लिखना , लिख कर फिर पूछना ..|
भाग्य में न जाने , कौन सा अभिशाप है .........,
रात में हु खूब पढता , सुबह मैदान मिलता साफ़ है ...||
नाश हो इतिहाश का , सपने समुद्र बह गए .....,
मरने के लिए वो मर गए , रोने के लिए हम रह गए ...|
गणित के अलावा मुझे कुछ आता नहीं ,लेकिन क्या करूँ..?
अलजेब्रा का माइनस प्लस , समझ में आता नहीं ....||
क्या कहु जीव-विज्ञान की कहानी ,
नर-कंकाल देखते ही याद आती है नानी ...|
ये प्रश्न भूगोल का है , गोल कैसे ये धरा ...?
मैंने लिख दिया चाट उत्तर खरा , गोल है पूरी -कचौरी ...
रशगुल्ला भी गोल है ,अतः शिक्षक महोदय
ये धरा भी गोल है ...||
शिक्षक ने कहा ... , ठीक है बेटा ,
तेरी लेखनी भी गोल है .........|
गोल है ये कलम दावात ,
ले तेरा नम्बर भी गोल है .....||
रोज मच्छर रात में , कहता यही कान में ...
होश कर के बैठना , इस बार इम्तिहान में .... |
आ गया तेरी शरण में , ज़िन्दगी से हार कर .....
मार थप्पड़ लात घूंसा , मेरा बेरा पार कर ....||
जिसने लिखी ये कविता , विपुल उसका नाम है ..|
स्टूडेंट है बी.आई.टी.एम. का , घर मेकर ग्राम है ....||
....... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~)
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