~~~ उत्थान ~~~
जीवन के हर पहलु को , समझने लगे जब इंसान ...
दुश्मन के हर चाल पे , हो जब उसका पूरा ध्यान ...
फूँक फूँक के कदम बढ़ाये , वास्तवीकता की हो पहचान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
मंजील पाने की चाहत में , बेचैन और बेकरार ...
अकेला ही चल परे जब , सिमित ना रहे संसार ...
मानवता की बेदी पे , जब बढने लगे मान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
एकता और अखंडता की , भावना से जब हो परिचय ...
अनुकूल और प्रतिकूल से , मिलवाए जब समय ...
लालच जब ना रह जाये मन में , पाने को कोई वरदान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
विश्वास के बंधन से जब , घिरने लगे इंसान ...
उसे तोरने को हावी हुए जब , खुद टूटने लगे हैवान ...
आत्मविश्वाश का जोरा पहने , पूरे हो जब अरमान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
अपने अन्दर छिपे गुण जब , दे रहे हो दर्शन ...
अँधेरे से बाहर आने को , चीत्कार उठे जब मन ...
विशिष्ठ जनों के प्रति दिल में , जब बढने लगे सम्मान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
कलम हमारी खुल के आज , करती ये आह्वान ...
विश्वाश जब मन में हो , कुछ करने का निर्माण ...
कठिन से कठिन मार्ग भी , जब लगने लगे आसान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
..........विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
जीवन के हर पहलु को , समझने लगे जब इंसान ...
दुश्मन के हर चाल पे , हो जब उसका पूरा ध्यान ...
फूँक फूँक के कदम बढ़ाये , वास्तवीकता की हो पहचान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
मंजील पाने की चाहत में , बेचैन और बेकरार ...
अकेला ही चल परे जब , सिमित ना रहे संसार ...
मानवता की बेदी पे , जब बढने लगे मान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
एकता और अखंडता की , भावना से जब हो परिचय ...
अनुकूल और प्रतिकूल से , मिलवाए जब समय ...
लालच जब ना रह जाये मन में , पाने को कोई वरदान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
विश्वास के बंधन से जब , घिरने लगे इंसान ...
उसे तोरने को हावी हुए जब , खुद टूटने लगे हैवान ...
आत्मविश्वाश का जोरा पहने , पूरे हो जब अरमान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
अपने अन्दर छिपे गुण जब , दे रहे हो दर्शन ...
अँधेरे से बाहर आने को , चीत्कार उठे जब मन ...
विशिष्ठ जनों के प्रति दिल में , जब बढने लगे सम्मान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
कलम हमारी खुल के आज , करती ये आह्वान ...
विश्वाश जब मन में हो , कुछ करने का निर्माण ...
कठिन से कठिन मार्ग भी , जब लगने लगे आसान ...
तभी आहट सी मिलती है , की हो रहा है उत्थान ...!!!
..........विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें