रविवार, 31 मार्च 2013

~~~ उत्थान ~~~

                          ~~~ उत्थान ~~~
जीवन के  हर पहलु को  , समझने  लगे   जब  इंसान ...
दुश्मन के हर  चाल पे  , हो जब उसका पूरा ध्यान ...
फूँक फूँक के कदम  बढ़ाये  , वास्तवीकता  की  हो पहचान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
मंजील  पाने की चाहत  में , बेचैन  और बेकरार ...
अकेला ही चल  परे जब  , सिमित    ना  रहे  संसार ...
मानवता  की  बेदी पे  , जब बढने  लगे  मान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
एकता और  अखंडता  की  , भावना  से जब  हो परिचय ...
अनुकूल और प्रतिकूल  से  , मिलवाए  जब समय  ...
लालच  जब  ना  रह  जाये  मन  में  , पाने  को कोई वरदान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
विश्वास  के बंधन  से  जब , घिरने लगे  इंसान ...
 उसे  तोरने  को  हावी  हुए  जब ,  खुद  टूटने  लगे  हैवान ...
आत्मविश्वाश  का जोरा पहने  , पूरे हो  जब  अरमान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
अपने  अन्दर  छिपे  गुण  जब  , दे रहे  हो  दर्शन ...
अँधेरे  से  बाहर  आने  को  , चीत्कार  उठे जब मन ...
विशिष्ठ जनों के  प्रति  दिल  में  , जब बढने  लगे  सम्मान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
कलम  हमारी  खुल  के  आज , करती  ये  आह्वान ...
विश्वाश  जब  मन  में हो  , कुछ  करने  का  निर्माण ...
कठिन  से  कठिन  मार्ग  भी , जब लगने  लगे  आसान ...
तभी  आहट  सी  मिलती  है , की  हो  रहा  है  उत्थान ...!!!
..........विपुल शरण श्रीवास्तव  (~ विप्स ~ )

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