~~~~~ ख्वाब ~~~~~
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया ,
खुदा से पूछा था एक सवाल मैंने ,
उस सवाल का सीधा जवाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(१ )
अगर होती खुबसूरती एक धर्म यहाँ ,
तो हर मंदिर के मूरत का ,
एक चेहरा नायाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(२ )
धरती पे उतारा रब्ब ने तुझे ,
संग में सुंदरता बेहिसाब आया ,
तेरे रूप की क्या तारीफ करुँ ,
ये तो वो एहशास है , जो थके पथिको को ,
जल संग देती हो छाया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(३ )
पता नहीं सच्चाई कह रहा हूँ मैं ,
या सुंदरता की है मोह - माया ,
जवाब सिर्फ एक ही है दिल में ,
सवालों का रुवाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(४)
तेरे रंग में रंग गया हूँ ,
जब से तुझे है पाया , '
मतलब जो नहीं था मुझे ,
इश्क़ जैसे शब्दों से ,
आज वो भी नशा बन के , है सिर पे छाया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(५)
दुनिया नहीं थी मेरी ये ,
तूने आ के उसे है बदला ,
अच्छी-खाशी तन्हाई थी ,
तूने खुबसूरती का रंग है घोला ,
एक झलक अपने सुन्दर चेहरे का ,
दिखा के तूने मुझे है हर्षाया ,
हर वक़्त अब तेरी सोंच में ,
इस मरते प्राणी को ,
जीना बेहिसाब आया .......
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(६)
तुझे देखा तो …………… एक ख्वाब आया ----------------
…………………… विपुल शरण श्रीवास्तव (~विप्स~)
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया ,
खुदा से पूछा था एक सवाल मैंने ,
उस सवाल का सीधा जवाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(१ )
अगर होती खुबसूरती एक धर्म यहाँ ,
तो हर मंदिर के मूरत का ,
एक चेहरा नायाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(२ )
धरती पे उतारा रब्ब ने तुझे ,
संग में सुंदरता बेहिसाब आया ,
तेरे रूप की क्या तारीफ करुँ ,
ये तो वो एहशास है , जो थके पथिको को ,
जल संग देती हो छाया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(३ )
पता नहीं सच्चाई कह रहा हूँ मैं ,
या सुंदरता की है मोह - माया ,
जवाब सिर्फ एक ही है दिल में ,
सवालों का रुवाब आया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(४)
तेरे रंग में रंग गया हूँ ,
जब से तुझे है पाया , '
मतलब जो नहीं था मुझे ,
इश्क़ जैसे शब्दों से ,
आज वो भी नशा बन के , है सिर पे छाया ,
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(५)
दुनिया नहीं थी मेरी ये ,
तूने आ के उसे है बदला ,
अच्छी-खाशी तन्हाई थी ,
तूने खुबसूरती का रंग है घोला ,
एक झलक अपने सुन्दर चेहरे का ,
दिखा के तूने मुझे है हर्षाया ,
हर वक़्त अब तेरी सोंच में ,
इस मरते प्राणी को ,
जीना बेहिसाब आया .......
तुझे देखा तो एक ख्वाब आया --------------------------(६)
तुझे देखा तो …………… एक ख्वाब आया ----------------
…………………… विपुल शरण श्रीवास्तव (~विप्स~)
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