मंगलवार, 28 जुलाई 2015

~~~~~कलाम तुम्हे सलाम~~~~~

`        ~~~~~कलाम तुम्हे सलाम~~~~~   
पृथ्वी की धुल भरी गोद में  , सबकी तरह जन्मने वाला  ...
बाधाओ की सीमाओं को लाँघ के  , अग्नि की उड़ान भरने वाला ...
पृथ्वी ,अग्नि , त्रिशूल , आकाश , और नाग  से  मिला जिन्हे , मिसाइल मैन का ताज़...
उस महाज्ञानी अब्दुल कलाम के रूप का , बूझ गया सितारा  आज ...
राष्ट्रहित पे मरने वाला  , राष्ट्रपति कहलाया एक दिन ...
संकल्प जो लिया था तुमने  , कैसे पूरा होगा तुम बिन ...
वो खुदा रुपी जौहरी का तराशा हुआ हीरा  , जिसपे  पूरे भारतवर्ष  को है  नाज़ ...
उस महामहीम  दिग्गज कलाम के रूप का , बूझ गया सितारा आज ...
विश्वजगत   पे हावी हुए  जो , बन के पूरे भारत  की आवाज़ ...
उस विज्ञान  के  संचालक , वैज्ञानिक रुपी कलाम का बूझ गया सितारा आज ...
जिसने भारत की गरिमा को , अपने ज्ञान से संवारा ...
जिसने भारत के गौरव को , अपने पहचान से निखारा...
उस विज्ञान के पुजारी को आज , शत शत नमन हमारा ... शत शत नमन हमारा ...
हे राष्ट्र गौरव  , हे भारत रत्न  , आज तुम्हारी विदाई में , अपनी श्रद्धांजली अर्पित करता हूँ ...
लिए प्रखर संकल्प ह्रदय में  , अपना सर्वस्व समर्पित करता हूँ ...
स्वीकार करो ये  प्रेम हमारा , हम अब वादा निभाएंगे ...
सपने जो आपने दिखाए हैं  , हम संपूर्ण भारत बनाएंगे ...
आज पूरे भारत वर्ष की तरफ से , विपुल की कलम से  ,
और आपके चहेते उन सारे युवा प्रतिभा , बाल प्रतिभा , भारतीय सेना ,
राजनेताओं और पूरे  विज्ञान की तरफ से .... सिर्फ एक वाक्या ......
........................" कलाम तुम्हे सलाम ".......................

                                                                               .... विपुल शरण ....

शनिवार, 2 मई 2015

~~~~~ २०१४ की यादें ~~~~~

          ~~~~~ २०१४  की  यादें ~~~~~
कैसी दिशाएं , कैसी दशाएं ,कैसी ये जीवन धारा है ...???
किसी की नैया पार लगी , तो किसी को समय ने मारा  है ...
अब मौसम के रंग बदल गए , प्रकृति नया रंग लाया है ...
आओ मिलकर देखे सब  , हमने कैसा साल बिताया हैं ...???
अब यादों की बरात में हम , निकले पिछले साल के ...
देखें मन में कितने पल , रखे हैं  हमने डाल के ...!!
आगाज़ नमो की आवाज़ से  , शेर जैसा गरजे जो ...
56  इंच का सीना जिसका , तूफ़ान बन के बरसे वो ...!
सोनिया की सेना चली थी राहुल को संग लेके , जीतने संसद के आलय को ...
कांग्रेस की शक्ति चीखी पर डिगा न सकी  , बी.जे.पी. के नमो रुपी हिमालय को ...!!
नमो नाम के लहर ने अब , ले लिया बड़ा  आकार है ...
प्रधान मंत्री के स्वच्क्ष  भारत के सपने को  , होना अब साकार है ...!
खेल की दुनिया में इस साल , कोलकाता ने दम ख़म दिखाया है ...
सिर्फ आई.पी.एल  नहीं  इस बार , आई.एस.एल ट्रॉफी भी संग लाया है ...!!
जहां क्रिकेट जगत से कुछ , दुखदायी खबरे आई हैं ...
फिलिप हूज की मौत ने सबकी , आँखों से अश्क़ बहाये  हैं ....!
जहां  फुटबॉल की दुनिया फीफा  में , जर्मनी ने नाम कमाए हैं ...
वही अर्जेंटीना की  हार ने  , मौके खूब गवाएं हैं ...!!
बॉलीवुड की गरमा-गरमी , बॉक्स ऑफिस पे मचलता  रहा ...
ह्रितिक की बैंग-बैंग और सल्लू की किक तक दहलता  रहा   ...!
पी.के. के एलियन ने  जहां , आमिर को बनाया फिर सबका डिअर ...
वही साल के अंत में , शाहरुख़ कह गए सबको हैप्पी न्यू ईयर  ...!!
कॉमेडी नाइट्स  की  टीम  को मिला , मौका जहां दुबई जाने का...
वही अर्पिता-आयुष ने लिया फैसला , शादी के बंधन में बंध जाने का...!
जहां मोटोरोला के फ़ोन्स ने मार्केट में आके  , सफलता की दीप जलाई है ...
वही हुद-हुद जैसी आपदा ने आके  , सबकी नींद भी  उड़ाई है...!
जहा हमारे मालवीय और वाजपेयी जी को  , दिया गया भारत रत्न है ...
वहीँ सफल हुआ हमारा , मंगल यान  का  प्रथम प्रयत्न है ...!
गूगल बॉय कौटिल्य ने जैसे , सबके मन को हर्षाया है ....
अचीन-सार्थक की जोड़ी ने वैसे , सपने  के.बी.सी.  को सार्थक बनाया है...!!
जहां फ्लिपकार्ट  के बिगबैंग डील ने , सबको  खूब ललचाया है ...
वही आईफोन 6  ने आके , अपना दम-ख़म दिखाया है ...!
जहां ईबोला वायरस ने , आतंकी असर दिखाया है ...
वही कितने समस्याओं को  हमने , आसानी  से सुलझाया  है ...!!
कितने दुःख और सुख के दिन , इस साल में बीते हैं ...
चलो आज अमृत रुपी ,  सच की प्याली पीते हैं ...!
 भूल भूला के दुःख के दिन  , आओ मिल के नए साल का ...
तरो-ताज़ा जीवन जीते हैं...!!
आप सभी को मेरी तरफ से नव - वर्ष की हार्दिक बधाईयाँ...
~~~~~नव - वर्ष  मंगल-मय हो ...2015...~~~~~
...... लेखक ....... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~)
   









~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~

~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~
ज़िन्दगी अपनी है  , शहर अपना है ...!
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
यहाँ इस जहाँ में , हर तोड़ का जोड़ है ,
सिर्फ रास्ता सही चुनना है , यहाँ हर गली पे मोड़ है...!
हर इंसान का यहाँ , अलग एक सपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!! 
छिपाओ न अपने रंग को , दिखा दो अपने ढंग को , 
पता नहीं फिर कब , मिले ये मौका ,
कही कोई दूसरा , मार न ले जाये चौका...!
फिर से अपनी मजिल पाने को , किसी को पनपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
वक़्त यहाँ ठहरता नहीं , किसी विशेष के लिए ,
क्या तुम ठहर पाओगे , अपने उद्देश्य के लिए ?
पहचान अपने आप को , निकाल  मन से पाप को... !
उस उद्देश्य को पाने को , सिर्फ तू बना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
      ........... विपुल शरण श्रीवास्तव ( ~ विप्स ~ )