शनिवार, 2 मई 2015

~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~

~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~
ज़िन्दगी अपनी है  , शहर अपना है ...!
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
यहाँ इस जहाँ में , हर तोड़ का जोड़ है ,
सिर्फ रास्ता सही चुनना है , यहाँ हर गली पे मोड़ है...!
हर इंसान का यहाँ , अलग एक सपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!! 
छिपाओ न अपने रंग को , दिखा दो अपने ढंग को , 
पता नहीं फिर कब , मिले ये मौका ,
कही कोई दूसरा , मार न ले जाये चौका...!
फिर से अपनी मजिल पाने को , किसी को पनपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
वक़्त यहाँ ठहरता नहीं , किसी विशेष के लिए ,
क्या तुम ठहर पाओगे , अपने उद्देश्य के लिए ?
पहचान अपने आप को , निकाल  मन से पाप को... !
उस उद्देश्य को पाने को , सिर्फ तू बना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
      ........... विपुल शरण श्रीवास्तव ( ~ विप्स ~ )

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