शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

आइये जाने बिहार के इस लाल को जिसने अपने कर्मों से बिहार की छवि को एक नयी पहचान दे दी है ।


बिहार की माटी अब तक कितने ही सपूतों को जन्म दे चुकी है । चाहे इतिहास के पन्नो को पलट के देखा जाये , या फिर वर्तमान की स्थिति, हमारे बिहार ने हमेशा ही इतिहास रचा है ।
बिहार और बिहारी शब्द किसी से अपरिचित नहीं है । हाँ ऐसी कुछ परिस्थितियाँ जरूर आयी जिनमे बिहार की छवि धूमिल करने की कोशिश की गयी
, हालात ऐसे कर दिये गए थे की बाहर के राज्यों मे एक बिहारी खुद को बिहारी कहने तक से डरने लगा । लेकिन इन परिस्थितियों से लड़ाई लड़ने को और और अपने बिहार की छवि को बदनाम ना होने देने के लिए भी एक बिहारी ने मुहिम छेड़ी । कहने को शुरुआत मे ये मुहिम सिर्फ एक फ़ेसबूक पेज थी , लेकिन आज करीब 4 साल बाद अनेक प्रयासों के बदौलत उस फ़ेसबूक पेज के शुरुआत को एक पंख लग गयी और वो उड़ान भर रही है । आज उस फ़ेसबूक पेज के प्रशंशकों की संख्या 1,75,000 से ज्यादा है ।
सिर्फ इतना ही नहीं आज उस पेज के नाम से खुद की वैबसाइट भी बन चुकी है जिसपे रोज़ करीब करीब हजारों की संख्या मे विजिटर्स विजिट करते हैं । जी हाँ मैं बातें कर रहा हूँ असीम उपलब्धियों के साथ अपनी पहचान बनाने वाले #अपना_बिहार और उसकी टीम की । कहते हैं जरूरत के समय जो काम आए वही सच्चा प्रेमी कहलाता है । आज मैं एक ऐसे बिहार प्रेमी के बारे मे आपको बताने जा रहा हूँ जिसकी सोंच ने अपना बिहार (आपन बिहार) को जन्म दिया और बिहार के कोने कोने से स्पर्धाओं तथा प्रतिभाओं को ढूंढ के उन्हे जग जाहीर करने का काम किया ।
                              सौजन्य : www.aapnabihar.com/
आज #आपना_बिहार के नाम से भी शायद ही कोई ऐसा हो जो परिचित ना हो । आइये आज मैं बताता हूँ , आपना बिहार जिसने बिहार की छवि को एक आयाम तक पहुंचाया है, उसकी कहानी के बारे में ।
ये हक़ीक़त है उस उत्साही और रचनात्मक शैली की लेखन कला रखने वाले एक 8वी कक्षा के विद्यार्थी की जिसने मुझसे हुई बातचीत मे अपनी पूरी सफल यात्रा की कहानी साझा की ।   
ये बताते हुये मुझे असीम खुशी और गर्व की अनुभूति हो रही है
, की आपना बिहार का जन्मदाता सिर्फ एक आठवी कक्षा का विद्यार्थी था, जो अभी इंटर की पढ़ाई कर रहा है और इंजीन्यरिंग एंट्रैन्स एक्जाम की तैयारी कर रहा है ।
#अविनाश_सिंह इस नाम से भले ही लोग परिचित हो ना हो, आपना बिहार के नाम से सभी परिचित हैं । और यही बात अविनाश का बिहार के प्रति समर्पण को दर्शाता है । जी हाँ अविनाश ही वो लड़का है जिसकी बातें मैं आपसे साझा कर रहा हूँ । अविनाश अपना बिहार का संस्थापक सदस्य है जिसकी लेखन कला ने सब को अपनी तरफ मोहित करने को मजबूर किया ।
लेखन प्रतिभा के धनी अविनाश से हुई एक खास मुलाक़ात मे मैं और मेरे साथी रंजन जी के द्वारा किए गए वार्ता के कुछ अनकही कहानी को मैं आप सब के साथ साझा करता हूँ ।
अविनाश के शब्दों में :
“ मैं जब आठवी कक्षा का छात्र था तब मेरे पास नोकिया का एक हैंडसेट फोन हुआ करता था जिस से मैं चोरी छुपे ही सही लेकिन फ़ेसबूक यूज किया करता था । तब फ़ेसबूक की उम्र की निर्धारण सीमा भी 13 साल नहीं थी । सच कहूँ तो मैंने फ़ेसबूक अकाउंट अपनी उम्र की सीमा बढ़ा के बनाई थी
, और तब सिर्फ मेरे मन मे खाली समय मे कुछ कुछ लिख के पोस्ट करने के ख्याल आते थे और मैं बस लिखता ही जाता था । बहुत सारी बातें मैंने यूं ही लिख डाली और उसे पोस्ट करता गया । मुझे प्रतिक्रियाओं से भी ज्यादा मतलब नहीं हुआ करता था क्यूंकी एक फोन से मैं सिर्फ कुछ लिख के पोस्ट कर पाऊँ और कुछ दोस्तो से बात कर पाऊँ इतने मे ही वो खाली समय निकल जाया करता था । कुछ दिनों बाद मुझे फ़ेसबूक के पेज बनाने के बारे मे जानकारी मिली और मेरे मन मे ये ख्याल दौड़ गया की मैं भी एक पेज बना सकता हूँ जिसपे बिहार के इतिहास , भूगोल और वर्तमान को अपने कलम से दिखा सकता हूँ ।
तब मैंने एक पेज उसी दिन बना डाला और आगे से बिहार के बारे मे जितनी भी सकारात्मक बातें मन मे आती सब कुछ उस पेज के माध्यम से दिखा देता । मैं हर रोज़ थोड़े समय लेके कुछ न कुछ लिखता था
, और उसे अपने पेज पे पोस्ट करता था । शुरुआती दिनों मे मैंने अपने पेज का नाम भोजपुरी मे #आपन_बिहार” रखा था जिसे आपना बिहार (aapnabihar) के नाम से आज आप सब जानते हैं । पूरे 2 साल तक जब तक की मैंने 10वी की परीक्षा पास नहीं कर ली, तब तक मैं अपना बिहार को एक पहचान देने मे सफल हो चुका था । उन दिनों हमारे पेज के करीब करीब 80,000 से ज्यादा प्रशंशक थे । कुछ दिनों बाद से हमे हमारे दोस्तो की मदद मिलने लगी और फिर इसके कार्य क्षेत्र मे एक अद्भूत विस्तार हुआ जिसके फलस्वरूप हमे बिहार से बाहर रह रहे हमारे बिहार के ही एक संगणक अभियंता केशव झा की मदद मिली और वैबसाइट बन के तैयार हुआ । कुछ और हमारे मित्र आगे आयें , जिनमे अंकित कुमार वर्मा , नेहा नुपूर , सुमन शेखर , प्रवीण कुमार , अभिषेक शरण जी का मुख्य योगदान रहा । हमारे फ़ेसबूक पेज का प्रचार प्रसार भी बढ़ गया । अगले 2 सालों मे हमने ढूंढ ढूंढ के बिहार के प्रतिभावान विद्यार्थियों से लेके एक ओहदे तक पहुंचे हुये प्रतिभा के धनी लोगो के बारे मे अपने पेज पे लिखना शुरू किया जिससे बिहार की छवि हर जगह अच्छी बनने लगी और हमे बिहार और बिहार से बाहर रहने वाले लोगो के द्वारा पसंद किया जाने लगा । इस बीच बिहार मे कुछ ऐसे काम भी हुये जिनकी वजह से बिहार की छवि को नुकसान पहुंचा, लेकिन हमारी टीम ने वहाँ पे भी “#मत_करो_बदनाम” के टैग के साथ बिहार की छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और सफलता हमारे हाथ लगी जिसकी वजह से आज भी बिहार का सम्मान बरकरार बना हुआ है । भविष्य मे हमने बिहार के विकाश के लिए बहुत सारी योजनाएँ बना रखी है । और अब हमारे साथ कुछ अच्छे और समाज के प्रतिष्ठित नाम जुड़ चुके हैं जिनके साथ से हम बिहार को हमेशा ही आगे ले के बढ़ते जाना चाहेंगे ” । 

इस के अलावे अविनाश ने हमे उसके कैरियर से संबन्धित बातें भी बताई जिनमे उसने बताया की वो अभी IIT-JEE की तैयारी कर रहा है और आगे चल कर इंजीन्यरिंग की पढ़ाई करना चाहता है । फिलहाल उसकी नज़र JEE की परीक्षा को पास कर के इंजीन्यरिंग मे प्रवेश पाना है और साथ ही साथ अपने खाली समय को #आपना_बिहार के लिए समर्पित करना है ।

आज अपना बिहार की टीम मे कई और सदस्य हैं जो स्वेच्छा से अपना बिहार को आगे बढ्ने मे अविनाश की मदद कर रहे हैं । मैं खुद को बहुत गर्वान्वित पाता हूँ जब भी अपना बिहार के लिए थोड़ा सा समय भी निकाल पाता हूँ । अविनाश के इस पहल “अपना बिहार" से प्रेरित हो के या इस के बारे मे जानने के बाद बिहार से बाहर रह रहे कई  बिहारियों ने भी अपने कदम बढ़ाये और अपना बिहार के लिए जितनी हो सके उतनी मदद की है । आगे भी मैं अपना बिहार को अपना समय तथा कर्म दोनों से योगदान दे के काफी संतुष्ट महसूस करूंगा और अपने बिहार की माटी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बना के रखने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा । मेरा सम्मान भरा सलाम है इस बिहार के सपूत अविनाश सिंह को जिसने बिहार की छवि को बचाए रखने और उसको और भी अच्छा बनाने के लिए आपना बिहार जैसे मंच की शुरुआत की और उसपे लगातार मेहनत कर रहा है । मैं आशा करता हूँ आप सब का साथ मिलेगा और हम सब मिल के एक दिन #आपना_बिहार को प्रसिद्धी के शिखर तक पहूँचाएंगे, जिससे हमारे बिहार के नागरिक दुनिया के किसी भी कोने मे रह के पूरे गर्व के साथ कहे की “ हाँ मैं एक बिहारी हूँ ” ।  

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