~~~~~~~~~~ पहचान~~~~~~~~~~
बुध्धि और विवेक के , पालने में है पली ...
उन्मुक्त गगन में पंख फैलाये , एक छोटी सी कली ।
शालीनता की मूरत , चेहरे पे विराजमान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
वाणी में उसके मधु छलकता , सपनो में सिमटा आसमान है ...
सपने है उसके खूब सुहाने , अनोखी उसकी उरान है ।
दिखने में तो लगती जैसे , दुनिया उसकी वीरान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
हर लक्ष्य को साधने के , तरीके उसको आते है ...
सफलता की सीढियों से ही जैसे , उसके रिश्तें नातें है ।
तितलियों जैसे पंख नहीं , फिर भी भरती उरान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
चाहतें असीमित सी है उसकी , आत्मबल की कमी नहीं ...
लक्ष्य को साधे निशाना , निगाहें उसकी जमीं परी !
सब से मिल जुल के रहती , बुरे भले का ज्ञान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
इतना कुछ बोल दिया , फिर क्यूँ सब मौन हैं ...
सफल भविष्य की कामना कर के , जाहिर करो वो कौन है ?
खुले गगन की पंछी है वो , यही उसकी दास्तान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
...... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
बुध्धि और विवेक के , पालने में है पली ...
उन्मुक्त गगन में पंख फैलाये , एक छोटी सी कली ।
शालीनता की मूरत , चेहरे पे विराजमान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
वाणी में उसके मधु छलकता , सपनो में सिमटा आसमान है ...
सपने है उसके खूब सुहाने , अनोखी उसकी उरान है ।
दिखने में तो लगती जैसे , दुनिया उसकी वीरान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
हर लक्ष्य को साधने के , तरीके उसको आते है ...
सफलता की सीढियों से ही जैसे , उसके रिश्तें नातें है ।
तितलियों जैसे पंख नहीं , फिर भी भरती उरान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
चाहतें असीमित सी है उसकी , आत्मबल की कमी नहीं ...
लक्ष्य को साधे निशाना , निगाहें उसकी जमीं परी !
सब से मिल जुल के रहती , बुरे भले का ज्ञान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
इतना कुछ बोल दिया , फिर क्यूँ सब मौन हैं ...
सफल भविष्य की कामना कर के , जाहिर करो वो कौन है ?
खुले गगन की पंछी है वो , यही उसकी दास्तान है ...
सबसे सौम्य सबमे अलग , उसकी यही पहचान है ।।
...... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )
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