मंगलवार, 9 जुलाई 2013

~~~~~~~~~~ पहचान ~~~~~~~~~~

~~~~~~~~~~ पहचान~~~~~~~~~~
बुध्धि  और  विवेक  के  , पालने में  है  पली ...
उन्मुक्त  गगन  में  पंख  फैलाये , एक  छोटी  सी  कली ।
शालीनता  की  मूरत  ,  चेहरे  पे विराजमान  है ...
सबसे  सौम्य  सबमे  अलग  , उसकी  यही   पहचान  है ।।
 वाणी  में  उसके  मधु  छलकता  , सपनो  में  सिमटा  आसमान  है ...
सपने  है उसके  खूब  सुहाने  , अनोखी  उसकी उरान  है ।
दिखने  में  तो  लगती  जैसे  , दुनिया  उसकी  वीरान  है ...
सबसे  सौम्य  सबमे  अलग  , उसकी  यही   पहचान  है ।।
हर  लक्ष्य  को  साधने  के  , तरीके  उसको  आते  है ...
सफलता  की  सीढियों  से  ही  जैसे , उसके  रिश्तें  नातें  है ।
तितलियों  जैसे  पंख  नहीं  , फिर  भी  भरती  उरान है ...
सबसे  सौम्य  सबमे  अलग  , उसकी  यही   पहचान  है ।।
चाहतें  असीमित सी  है  उसकी  ,  आत्मबल  की  कमी  नहीं ...
लक्ष्य  को  साधे  निशाना  , निगाहें  उसकी  जमीं  परी !
सब  से मिल  जुल  के  रहती , बुरे  भले  का  ज्ञान  है ...
सबसे  सौम्य  सबमे  अलग  , उसकी  यही   पहचान  है ।।
इतना  कुछ  बोल दिया , फिर  क्यूँ  सब  मौन  हैं ...
सफल  भविष्य  की  कामना कर  के  , जाहिर  करो वो  कौन  है ?
खुले  गगन  की  पंछी  है  वो , यही उसकी दास्तान  है ...
सबसे  सौम्य  सबमे  अलग  , उसकी  यही   पहचान  है ।।
                                ...... विपुल  शरण  श्रीवास्तव (~ विप्स ~ )

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें