शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

आइये जाने बिहार के इस लाल को जिसने अपने कर्मों से बिहार की छवि को एक नयी पहचान दे दी है ।


बिहार की माटी अब तक कितने ही सपूतों को जन्म दे चुकी है । चाहे इतिहास के पन्नो को पलट के देखा जाये , या फिर वर्तमान की स्थिति, हमारे बिहार ने हमेशा ही इतिहास रचा है ।
बिहार और बिहारी शब्द किसी से अपरिचित नहीं है । हाँ ऐसी कुछ परिस्थितियाँ जरूर आयी जिनमे बिहार की छवि धूमिल करने की कोशिश की गयी
, हालात ऐसे कर दिये गए थे की बाहर के राज्यों मे एक बिहारी खुद को बिहारी कहने तक से डरने लगा । लेकिन इन परिस्थितियों से लड़ाई लड़ने को और और अपने बिहार की छवि को बदनाम ना होने देने के लिए भी एक बिहारी ने मुहिम छेड़ी । कहने को शुरुआत मे ये मुहिम सिर्फ एक फ़ेसबूक पेज थी , लेकिन आज करीब 4 साल बाद अनेक प्रयासों के बदौलत उस फ़ेसबूक पेज के शुरुआत को एक पंख लग गयी और वो उड़ान भर रही है । आज उस फ़ेसबूक पेज के प्रशंशकों की संख्या 1,75,000 से ज्यादा है ।
सिर्फ इतना ही नहीं आज उस पेज के नाम से खुद की वैबसाइट भी बन चुकी है जिसपे रोज़ करीब करीब हजारों की संख्या मे विजिटर्स विजिट करते हैं । जी हाँ मैं बातें कर रहा हूँ असीम उपलब्धियों के साथ अपनी पहचान बनाने वाले #अपना_बिहार और उसकी टीम की । कहते हैं जरूरत के समय जो काम आए वही सच्चा प्रेमी कहलाता है । आज मैं एक ऐसे बिहार प्रेमी के बारे मे आपको बताने जा रहा हूँ जिसकी सोंच ने अपना बिहार (आपन बिहार) को जन्म दिया और बिहार के कोने कोने से स्पर्धाओं तथा प्रतिभाओं को ढूंढ के उन्हे जग जाहीर करने का काम किया ।
                              सौजन्य : www.aapnabihar.com/
आज #आपना_बिहार के नाम से भी शायद ही कोई ऐसा हो जो परिचित ना हो । आइये आज मैं बताता हूँ , आपना बिहार जिसने बिहार की छवि को एक आयाम तक पहुंचाया है, उसकी कहानी के बारे में ।
ये हक़ीक़त है उस उत्साही और रचनात्मक शैली की लेखन कला रखने वाले एक 8वी कक्षा के विद्यार्थी की जिसने मुझसे हुई बातचीत मे अपनी पूरी सफल यात्रा की कहानी साझा की ।   
ये बताते हुये मुझे असीम खुशी और गर्व की अनुभूति हो रही है
, की आपना बिहार का जन्मदाता सिर्फ एक आठवी कक्षा का विद्यार्थी था, जो अभी इंटर की पढ़ाई कर रहा है और इंजीन्यरिंग एंट्रैन्स एक्जाम की तैयारी कर रहा है ।
#अविनाश_सिंह इस नाम से भले ही लोग परिचित हो ना हो, आपना बिहार के नाम से सभी परिचित हैं । और यही बात अविनाश का बिहार के प्रति समर्पण को दर्शाता है । जी हाँ अविनाश ही वो लड़का है जिसकी बातें मैं आपसे साझा कर रहा हूँ । अविनाश अपना बिहार का संस्थापक सदस्य है जिसकी लेखन कला ने सब को अपनी तरफ मोहित करने को मजबूर किया ।
लेखन प्रतिभा के धनी अविनाश से हुई एक खास मुलाक़ात मे मैं और मेरे साथी रंजन जी के द्वारा किए गए वार्ता के कुछ अनकही कहानी को मैं आप सब के साथ साझा करता हूँ ।
अविनाश के शब्दों में :
“ मैं जब आठवी कक्षा का छात्र था तब मेरे पास नोकिया का एक हैंडसेट फोन हुआ करता था जिस से मैं चोरी छुपे ही सही लेकिन फ़ेसबूक यूज किया करता था । तब फ़ेसबूक की उम्र की निर्धारण सीमा भी 13 साल नहीं थी । सच कहूँ तो मैंने फ़ेसबूक अकाउंट अपनी उम्र की सीमा बढ़ा के बनाई थी
, और तब सिर्फ मेरे मन मे खाली समय मे कुछ कुछ लिख के पोस्ट करने के ख्याल आते थे और मैं बस लिखता ही जाता था । बहुत सारी बातें मैंने यूं ही लिख डाली और उसे पोस्ट करता गया । मुझे प्रतिक्रियाओं से भी ज्यादा मतलब नहीं हुआ करता था क्यूंकी एक फोन से मैं सिर्फ कुछ लिख के पोस्ट कर पाऊँ और कुछ दोस्तो से बात कर पाऊँ इतने मे ही वो खाली समय निकल जाया करता था । कुछ दिनों बाद मुझे फ़ेसबूक के पेज बनाने के बारे मे जानकारी मिली और मेरे मन मे ये ख्याल दौड़ गया की मैं भी एक पेज बना सकता हूँ जिसपे बिहार के इतिहास , भूगोल और वर्तमान को अपने कलम से दिखा सकता हूँ ।
तब मैंने एक पेज उसी दिन बना डाला और आगे से बिहार के बारे मे जितनी भी सकारात्मक बातें मन मे आती सब कुछ उस पेज के माध्यम से दिखा देता । मैं हर रोज़ थोड़े समय लेके कुछ न कुछ लिखता था
, और उसे अपने पेज पे पोस्ट करता था । शुरुआती दिनों मे मैंने अपने पेज का नाम भोजपुरी मे #आपन_बिहार” रखा था जिसे आपना बिहार (aapnabihar) के नाम से आज आप सब जानते हैं । पूरे 2 साल तक जब तक की मैंने 10वी की परीक्षा पास नहीं कर ली, तब तक मैं अपना बिहार को एक पहचान देने मे सफल हो चुका था । उन दिनों हमारे पेज के करीब करीब 80,000 से ज्यादा प्रशंशक थे । कुछ दिनों बाद से हमे हमारे दोस्तो की मदद मिलने लगी और फिर इसके कार्य क्षेत्र मे एक अद्भूत विस्तार हुआ जिसके फलस्वरूप हमे बिहार से बाहर रह रहे हमारे बिहार के ही एक संगणक अभियंता केशव झा की मदद मिली और वैबसाइट बन के तैयार हुआ । कुछ और हमारे मित्र आगे आयें , जिनमे अंकित कुमार वर्मा , नेहा नुपूर , सुमन शेखर , प्रवीण कुमार , अभिषेक शरण जी का मुख्य योगदान रहा । हमारे फ़ेसबूक पेज का प्रचार प्रसार भी बढ़ गया । अगले 2 सालों मे हमने ढूंढ ढूंढ के बिहार के प्रतिभावान विद्यार्थियों से लेके एक ओहदे तक पहुंचे हुये प्रतिभा के धनी लोगो के बारे मे अपने पेज पे लिखना शुरू किया जिससे बिहार की छवि हर जगह अच्छी बनने लगी और हमे बिहार और बिहार से बाहर रहने वाले लोगो के द्वारा पसंद किया जाने लगा । इस बीच बिहार मे कुछ ऐसे काम भी हुये जिनकी वजह से बिहार की छवि को नुकसान पहुंचा, लेकिन हमारी टीम ने वहाँ पे भी “#मत_करो_बदनाम” के टैग के साथ बिहार की छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और सफलता हमारे हाथ लगी जिसकी वजह से आज भी बिहार का सम्मान बरकरार बना हुआ है । भविष्य मे हमने बिहार के विकाश के लिए बहुत सारी योजनाएँ बना रखी है । और अब हमारे साथ कुछ अच्छे और समाज के प्रतिष्ठित नाम जुड़ चुके हैं जिनके साथ से हम बिहार को हमेशा ही आगे ले के बढ़ते जाना चाहेंगे ” । 

इस के अलावे अविनाश ने हमे उसके कैरियर से संबन्धित बातें भी बताई जिनमे उसने बताया की वो अभी IIT-JEE की तैयारी कर रहा है और आगे चल कर इंजीन्यरिंग की पढ़ाई करना चाहता है । फिलहाल उसकी नज़र JEE की परीक्षा को पास कर के इंजीन्यरिंग मे प्रवेश पाना है और साथ ही साथ अपने खाली समय को #आपना_बिहार के लिए समर्पित करना है ।

आज अपना बिहार की टीम मे कई और सदस्य हैं जो स्वेच्छा से अपना बिहार को आगे बढ्ने मे अविनाश की मदद कर रहे हैं । मैं खुद को बहुत गर्वान्वित पाता हूँ जब भी अपना बिहार के लिए थोड़ा सा समय भी निकाल पाता हूँ । अविनाश के इस पहल “अपना बिहार" से प्रेरित हो के या इस के बारे मे जानने के बाद बिहार से बाहर रह रहे कई  बिहारियों ने भी अपने कदम बढ़ाये और अपना बिहार के लिए जितनी हो सके उतनी मदद की है । आगे भी मैं अपना बिहार को अपना समय तथा कर्म दोनों से योगदान दे के काफी संतुष्ट महसूस करूंगा और अपने बिहार की माटी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बना के रखने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा । मेरा सम्मान भरा सलाम है इस बिहार के सपूत अविनाश सिंह को जिसने बिहार की छवि को बचाए रखने और उसको और भी अच्छा बनाने के लिए आपना बिहार जैसे मंच की शुरुआत की और उसपे लगातार मेहनत कर रहा है । मैं आशा करता हूँ आप सब का साथ मिलेगा और हम सब मिल के एक दिन #आपना_बिहार को प्रसिद्धी के शिखर तक पहूँचाएंगे, जिससे हमारे बिहार के नागरिक दुनिया के किसी भी कोने मे रह के पूरे गर्व के साथ कहे की “ हाँ मैं एक बिहारी हूँ ” ।  

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

================ 2015 की यादें ===============

================ 2015 की यादें ===============
दौड़ा दौड़ा थक गया , समय समय का डाल
घटनाओं का चक्र पिरोये , बीता पिछला साल ।
चलो एक बार चक्र घुमाये , कुछ पुरानी यादें दोहराएँ ,
याद करे कुछ बीते पल , कुछ खट्टे कुछ मीठे पल ।
एक छोटी सी आँधी आयी  , बिहार चुनाव की क्रांति लायी
महागठबंधन की शक्ति , नितीश कुमार को वापस लायी ।
पीएम मोदी का सपना , होता कुछ साकार दिखा ,
मेक इन इंडिया की नीति ने , अपना सही आकार लिया ।
सहिष्णुता – असहिष्णुता की बहस ने जहां , पूरे समाज को निचोड़ दिया
प्रधान मंत्री की विदेश यात्राओं ने , वहीं अलग एक मोड़ लिया ।
जहां हार्दिक के होड़ से  , गूंज गया गुजरात ,
वही केजरीवाल ने वापस आके , छेड़ी फिर से अपनी बात ।
इबोला वाइरस से मुक्ति , ये बोलबाला बरकरार रखा ,
डेंगू के मच्छर ने भी , आखिरकार हथियार रखा ।
ऑस्ट्रेलिया की टीम ने जहां , पाँचवी बार विश्व कप अपने नाम किया ,
वही वीरू जैसी हस्ती ने , खुद को है आराम दिया ।
मूलतान के इस सुल्तान की , विदाई के ये वर्ष रहा,
अफ्रीकियों पे टेस्ट विजय , इस साल सहर्ष रहा ।
जहां नेपाल के भूकंप और चेन्नई के बाढ़ ने , कितने इरादे तोड़े  हैं ,
वहीं कुछ लोकप्रिय चेहरो ने  , अटूट बंधन जोड़े  हैं ।
अग्नि-5 का सफल परीक्षण , पृथ्वी-2 के संग हुआ ,
दुश्मनों के चाल का ,  ये रंग भी  बेरंग हुआ ।
जहां सुखद एहशाश हुआ  , केप्लर444 को पाने मे ,
वही दुख के आंशू भी छलके , अपनों को गँवाने में ।
जहां आर के लक्ष्मण जैसी , हस्ती को हमने खोया है  ,
वहीं प्यारे कलाम साहब की , यादों मे हमने रोया है  ।
बॉलीवुड के मंच पे भी हुई , खूब ड्रामेबाजी ,
बाहुबली के बाहुबल ने , सब को कर लिया राज़ी ।
कटप्पा का किरदार आखिर, छोड़ गया एक संशय ,
देखना अब ये है , किसकी होती है विजय ।
बजरंगी भाईजान ने सिखायी , हम सब को एक सीख है ,
मिल जुल के रहना सीखो , हम भारतीयों की ये चीख है ।
जन धन की योजना भी , बखूबी रंग लायी ,
गिनीज़ बूक के वर्ल्ड रेकॉर्ड में , जाके है  समायी ।
जहां मलाला के मशाल ने , एक अलग ज्योत जलायी ,
वहीं सत्यार्थी के तथ्यों ने , नोबेल की जीत दिलायी ।
जहां डिजिटल इंडिया की पहल ने , दी है एक ठोश शुरुआत,
वहीं मोदी जी के मंत्रों ने , बढ़ाये खूब निर्यात ।
जहां सेल्फी के आईने मे , नूर पूरा वेश हुआ ,
वहीं आईफोन और विंडोज के मद मे , चूर पूरा देश हुआ ।
साल 2015 की गलतियों को , आज आओ लिख लें ,
कुछ अच्छी कुछ बुरी बातों की , यादों से हम सीख लें ।
नए समय में हो आपके घर में , खुशियाँ बेमिशाल
आओ मिल के जीते हैं हम , अपना अगला साल ।।
नव वर्ष मंगलमय हो .......... आप सभी को नव वर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनायें ।
                                           लेखक :- विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~)

   








मंगलवार, 28 जुलाई 2015

~~~~~कलाम तुम्हे सलाम~~~~~

`        ~~~~~कलाम तुम्हे सलाम~~~~~   
पृथ्वी की धुल भरी गोद में  , सबकी तरह जन्मने वाला  ...
बाधाओ की सीमाओं को लाँघ के  , अग्नि की उड़ान भरने वाला ...
पृथ्वी ,अग्नि , त्रिशूल , आकाश , और नाग  से  मिला जिन्हे , मिसाइल मैन का ताज़...
उस महाज्ञानी अब्दुल कलाम के रूप का , बूझ गया सितारा  आज ...
राष्ट्रहित पे मरने वाला  , राष्ट्रपति कहलाया एक दिन ...
संकल्प जो लिया था तुमने  , कैसे पूरा होगा तुम बिन ...
वो खुदा रुपी जौहरी का तराशा हुआ हीरा  , जिसपे  पूरे भारतवर्ष  को है  नाज़ ...
उस महामहीम  दिग्गज कलाम के रूप का , बूझ गया सितारा आज ...
विश्वजगत   पे हावी हुए  जो , बन के पूरे भारत  की आवाज़ ...
उस विज्ञान  के  संचालक , वैज्ञानिक रुपी कलाम का बूझ गया सितारा आज ...
जिसने भारत की गरिमा को , अपने ज्ञान से संवारा ...
जिसने भारत के गौरव को , अपने पहचान से निखारा...
उस विज्ञान के पुजारी को आज , शत शत नमन हमारा ... शत शत नमन हमारा ...
हे राष्ट्र गौरव  , हे भारत रत्न  , आज तुम्हारी विदाई में , अपनी श्रद्धांजली अर्पित करता हूँ ...
लिए प्रखर संकल्प ह्रदय में  , अपना सर्वस्व समर्पित करता हूँ ...
स्वीकार करो ये  प्रेम हमारा , हम अब वादा निभाएंगे ...
सपने जो आपने दिखाए हैं  , हम संपूर्ण भारत बनाएंगे ...
आज पूरे भारत वर्ष की तरफ से , विपुल की कलम से  ,
और आपके चहेते उन सारे युवा प्रतिभा , बाल प्रतिभा , भारतीय सेना ,
राजनेताओं और पूरे  विज्ञान की तरफ से .... सिर्फ एक वाक्या ......
........................" कलाम तुम्हे सलाम ".......................

                                                                               .... विपुल शरण ....

शनिवार, 2 मई 2015

~~~~~ २०१४ की यादें ~~~~~

          ~~~~~ २०१४  की  यादें ~~~~~
कैसी दिशाएं , कैसी दशाएं ,कैसी ये जीवन धारा है ...???
किसी की नैया पार लगी , तो किसी को समय ने मारा  है ...
अब मौसम के रंग बदल गए , प्रकृति नया रंग लाया है ...
आओ मिलकर देखे सब  , हमने कैसा साल बिताया हैं ...???
अब यादों की बरात में हम , निकले पिछले साल के ...
देखें मन में कितने पल , रखे हैं  हमने डाल के ...!!
आगाज़ नमो की आवाज़ से  , शेर जैसा गरजे जो ...
56  इंच का सीना जिसका , तूफ़ान बन के बरसे वो ...!
सोनिया की सेना चली थी राहुल को संग लेके , जीतने संसद के आलय को ...
कांग्रेस की शक्ति चीखी पर डिगा न सकी  , बी.जे.पी. के नमो रुपी हिमालय को ...!!
नमो नाम के लहर ने अब , ले लिया बड़ा  आकार है ...
प्रधान मंत्री के स्वच्क्ष  भारत के सपने को  , होना अब साकार है ...!
खेल की दुनिया में इस साल , कोलकाता ने दम ख़म दिखाया है ...
सिर्फ आई.पी.एल  नहीं  इस बार , आई.एस.एल ट्रॉफी भी संग लाया है ...!!
जहां क्रिकेट जगत से कुछ , दुखदायी खबरे आई हैं ...
फिलिप हूज की मौत ने सबकी , आँखों से अश्क़ बहाये  हैं ....!
जहां  फुटबॉल की दुनिया फीफा  में , जर्मनी ने नाम कमाए हैं ...
वही अर्जेंटीना की  हार ने  , मौके खूब गवाएं हैं ...!!
बॉलीवुड की गरमा-गरमी , बॉक्स ऑफिस पे मचलता  रहा ...
ह्रितिक की बैंग-बैंग और सल्लू की किक तक दहलता  रहा   ...!
पी.के. के एलियन ने  जहां , आमिर को बनाया फिर सबका डिअर ...
वही साल के अंत में , शाहरुख़ कह गए सबको हैप्पी न्यू ईयर  ...!!
कॉमेडी नाइट्स  की  टीम  को मिला , मौका जहां दुबई जाने का...
वही अर्पिता-आयुष ने लिया फैसला , शादी के बंधन में बंध जाने का...!
जहां मोटोरोला के फ़ोन्स ने मार्केट में आके  , सफलता की दीप जलाई है ...
वही हुद-हुद जैसी आपदा ने आके  , सबकी नींद भी  उड़ाई है...!
जहा हमारे मालवीय और वाजपेयी जी को  , दिया गया भारत रत्न है ...
वहीँ सफल हुआ हमारा , मंगल यान  का  प्रथम प्रयत्न है ...!
गूगल बॉय कौटिल्य ने जैसे , सबके मन को हर्षाया है ....
अचीन-सार्थक की जोड़ी ने वैसे , सपने  के.बी.सी.  को सार्थक बनाया है...!!
जहां फ्लिपकार्ट  के बिगबैंग डील ने , सबको  खूब ललचाया है ...
वही आईफोन 6  ने आके , अपना दम-ख़म दिखाया है ...!
जहां ईबोला वायरस ने , आतंकी असर दिखाया है ...
वही कितने समस्याओं को  हमने , आसानी  से सुलझाया  है ...!!
कितने दुःख और सुख के दिन , इस साल में बीते हैं ...
चलो आज अमृत रुपी ,  सच की प्याली पीते हैं ...!
 भूल भूला के दुःख के दिन  , आओ मिल के नए साल का ...
तरो-ताज़ा जीवन जीते हैं...!!
आप सभी को मेरी तरफ से नव - वर्ष की हार्दिक बधाईयाँ...
~~~~~नव - वर्ष  मंगल-मय हो ...2015...~~~~~
...... लेखक ....... विपुल शरण श्रीवास्तव (~ विप्स ~)
   









~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~

~~~~~~~ दिन अपना है ~~~~~~~~
ज़िन्दगी अपनी है  , शहर अपना है ...!
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
यहाँ इस जहाँ में , हर तोड़ का जोड़ है ,
सिर्फ रास्ता सही चुनना है , यहाँ हर गली पे मोड़ है...!
हर इंसान का यहाँ , अलग एक सपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!! 
छिपाओ न अपने रंग को , दिखा दो अपने ढंग को , 
पता नहीं फिर कब , मिले ये मौका ,
कही कोई दूसरा , मार न ले जाये चौका...!
फिर से अपनी मजिल पाने को , किसी को पनपना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
वक़्त यहाँ ठहरता नहीं , किसी विशेष के लिए ,
क्या तुम ठहर पाओगे , अपने उद्देश्य के लिए ?
पहचान अपने आप को , निकाल  मन से पाप को... !
उस उद्देश्य को पाने को , सिर्फ तू बना है ,
जी लो जी भर के दोस्त , दिन अपना है ...!!
      ........... विपुल शरण श्रीवास्तव ( ~ विप्स ~ )

शनिवार, 7 जून 2014

~~~ पहली उड़ान ~~~

                     ~~~  पहली  उड़ान  ~~~
याद  करते  हैं  हम  ,  उन  पुराने  पलों  को  …
जो  हैं  हमने  अपने  ,  विद्यालय  में  बिताया  … !
हम  विद्यार्थी  थे  ,  विद्या  की  अर्थी  उठाने  वाले  …
ये  हमें  खुद   ,  समय  ने  बताया  … !!
चलते  रहें  हम  उसी  राह  पे  , और  कहाँ  जा  खरे  हुए  …
खुद   का   ही  पता  नहीं  , जिन्दा  थे  या  मरे  हुए  … !
जब  हुआ  सच्चाई  का  सामना  हमें ,  गिरगिरा  के  रो   पड़ें   …
तब  खाई  थी  एक  कसम  , और  सच  के  साथ  निकल  पड़ें  … !!
थोड़ा  मुश्किल  था  चलना  लेकिन , आत्म-विश्वाश  का  साथ  था   …
मंज़िल  भले  ही  दूर  थी  अभी  ,  लेकिन  परवरदिगार  का  हाथ  था  … !
देता  गया  साथ  मैं  सच्चाई  का  ,  फिर  उगता  गया  सूरज  सफलता  के इकाई का  …
धीरे - धीरे  मिली  मुझे  ,  सफलता  की  पहचान  थी  … !
अब  जो चेहरा  खिला  था  मेरा  , वो  विद्या  के  अर्थी  उठाने  वाले  की  नहीं  …
विद्या  के  आरती  उतारने  वाले  की  ,  ये  पहली  उड़ान  थी  … !!
लेखक  ---------- विपुल  शरण  श्रीवास्तव  (~  विप्स  ~ )

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

~~~~~ ख्वाब ~~~~~

           ~~~~~ ख्वाब ~~~~~
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया  ,
खुदा  से  पूछा  था  एक  सवाल  मैंने  ,
उस  सवाल  का  सीधा  जवाब  आया ,
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(१ )
अगर  होती  खुबसूरती  एक  धर्म  यहाँ  ,
तो  हर  मंदिर  के  मूरत  का ,
एक चेहरा  नायाब  आया  ,
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(२ )
धरती  पे  उतारा  रब्ब  ने  तुझे  ,
संग  में  सुंदरता  बेहिसाब  आया  ,
तेरे  रूप  की  क्या  तारीफ  करुँ  ,
ये  तो  वो  एहशास  है , जो थके  पथिको  को ,
जल  संग  देती  हो  छाया  ,
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(३ )
पता  नहीं  सच्चाई  कह  रहा  हूँ  मैं  ,
या  सुंदरता  की  है  मोह - माया  ,
जवाब  सिर्फ  एक  ही  है  दिल  में  ,
सवालों  का  रुवाब  आया  ,
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(४)
तेरे  रंग  में  रंग  गया  हूँ  ,
जब  से  तुझे  है  पाया  , '
मतलब  जो  नहीं  था   मुझे  ,
इश्क़  जैसे  शब्दों  से  ,
आज  वो  भी  नशा  बन  के  , है  सिर  पे  छाया ,
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(५)
दुनिया  नहीं  थी  मेरी  ये  ,
तूने  आ के  उसे  है  बदला  ,
अच्छी-खाशी  तन्हाई  थी  ,
तूने खुबसूरती  का  रंग  है  घोला  ,
एक झलक  अपने  सुन्दर  चेहरे  का ,
दिखा  के  तूने  मुझे  है  हर्षाया  ,
हर  वक़्त  अब  तेरी  सोंच  में  ,
इस  मरते  प्राणी  को  ,
जीना  बेहिसाब  आया  .......
तुझे  देखा  तो  एक  ख्वाब  आया   --------------------------(६)
तुझे  देखा  तो …………… एक  ख्वाब  आया ----------------
…………………… विपुल  शरण  श्रीवास्तव (~विप्स~)